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जांच के घेरे में अधिशासी अधिकारी को मिला कालपी नगर पालिका का अतिरिक्त प्रभार

उरई में जांच के घेरे में EO, अब कालपी नगर पालिका का भी अतिरिक्त चार्ज!

 

बड़ा सवाल—जिस अधिकारी की उरई में जांच चल रही है, उसी पर कालपी की जिम्मेदारी क्यों? शासनादेश ने खड़े किए कई सवाल

 

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जनपद जालौन की नगर पालिका व्यवस्था से जुड़ा एक शासनादेश सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर नगर निकायों तक सवाल खड़े हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास अनुभाग-4 द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप के मुताबिक नगर पालिका परिषद उरई के अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील को नगर पालिका परिषद कालपी के अधिशासी अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से सौंपा गया है।

 

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था नितान्त अस्थायी और काम चलाऊ व्यवस्था के अंतर्गत है तथा कालपी नगर पालिका में नियमित अधिशासी अधिकारी की तैनाती होने पर यह अतिरिक्त प्रभार स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसके लिए अधिकारी को कोई अतिरिक्त वेतन-भत्ता भी देय नहीं होगा।

 

लेकिन इस आदेश के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उरई नगर पालिका परिषद में जिनके कार्यकाल और कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों की जांच चल रही है, उन्हीं अधिकारी को कालपी नगर पालिका की अतिरिक्त जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?

 

जांच चल रही है, फिर अतिरिक्त जिम्मेदारी क्यों?

 

उरई नगर पालिका परिषद से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर हाल में जांच की प्रक्रिया चर्चा में रही है।

ऐसे में अब उसी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को पड़ोसी नगर पालिका कालपी का भी अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

यहां सवाल किसी अधिकारी को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि जांच की निष्पक्षता और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता का है।

 

सवाल नंबर-1: जब उरई नगर पालिका में जांच चल रही है तो उसी समय वहां के अधिशासी अधिकारी को दूसरे नगर निकाय का अतिरिक्त प्रभार देना कितना उचित है?

 

सवाल नंबर-2: क्या शासन स्तर पर अधिकारी को कालपी का अतिरिक्त चार्ज देने से पहले उरई में चल रही जांच और उससे संबंधित परिस्थितियों का संज्ञान लिया गया?

 

सवाल नंबर-3: क्या कालपी नगर पालिका के लिए किसी अन्य अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया जा सकता था?

 

सवाल नंबर-4: क्या अतिरिक्त प्रभार देने से कालपी नगर पालिका के प्रशासनिक कार्यों पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

 

सवाल नंबर-5: यदि उरई नगर पालिका से संबंधित जांच में कोई गंभीर प्रशासनिक तथ्य सामने आता है, तो क्या इसका असर अतिरिक्त प्रभार वाली जिम्मेदारी पर भी पड़ेगा?

 

जनता पूछ रही—जांच और जिम्मेदारी का यह कैसा समीकरण?

 

कालपी नगर पालिका पहले से ही नागरिक सुविधाओं, सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर जनता की निगाह में रहती है।

ऐसे में कालपी के अधिशासी अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार उसी अधिकारी को दिए जाने के बाद अब शहर के लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।

 

क्या शासन ने यह फैसला केवल अधिकारी की उपलब्धता के आधार पर लिया है?

क्या उरई में चल रही जांच का इस निर्णय पर कोई असर नहीं माना गया?

क्या शासनादेश जारी करने से पहले स्थानीय स्तर की परिस्थितियों की रिपोर्ट ली गई थी?

 

इन सवालों के जवाब शासन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षित हैं।

 

क्या कहता है 30 जुलाई का शासनादेश?

 

उत्तर प्रदेश शासन, नगर विकास अनुभाग-4 के कार्यालय ज्ञाप संख्या 14-14974नौ-4-2026, दिनांक 30 जुलाई 2026 में नितान्त अस्थायी कामचलाऊ व्यवस्था के तहत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि—

राम अचल कुरील, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद उरई को नगर पालिका परिषद कालपी, जनपद जालौन के अधिशासी अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है।

 

शासनादेश के अनुसार नियमित अधिशासी अधिकारी की तैनाती होने पर यह अतिरिक्त प्रभार स्वतः समाप्त हो जाएगा।

 

आदेश रवीन्द्र सिंह, अनु सचिव की ओर से जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि निदेशक नगर निकाय निदेशालय उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी जालौन, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद कालपी सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।

 

अब असली सवाल—कालपी का होगा कल्याण या बढ़ेगा सवालों का सिलसिला?

 

शासन के इस निर्णय पर राजनीतिक या व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय अब जरूरत है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सामने आए।

यदि शासन के पास इस अतिरिक्त प्रभार के पीछे प्रशासनिक कारण हैं तो उन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि जनता के बीच उठ रहे सवालों पर विराम लग सके।

 

वहीं यदि उरई नगर पालिका से संबंधित जांच अभी विचाराधीन है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जांच की निष्पक्षता और अतिरिक्त प्रभार के बीच किसी प्रकार का प्रशासनिक टकराव तो नहीं है।

 

फिलहाल शासनादेश सामने है और सवाल भी सामने हैं।

 

अब देखना यह है कि शासन, नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं।

 

जनता के सवाल

क्या जांच के बीच अतिरिक्त चार्ज देना उचित है?

क्या शासन को उरई की जांच का संज्ञान लेकर निर्णय नहीं लेना चाहिए था?

कालपी के लिए किसी अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई?

क्या यह महज कामचलाऊ व्यवस्था है या इसके पीछे कोई और प्रशासनिक वजह है?

क्या जनता को इस फैसले की पूरी वजह बताई जाएगी?

जिला संवाददाता

गायत्री निषाद की कलम से

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